देख मेरी व्याकुलता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब भी विपता आई मैंने श्याम को याद किया,

खाटू वाले श्याम का ही मैंने मुख से नाम लिया,

दीं दयालु के होते जब था मन गबराया,

देख मेरी व्याकुलता को बाबा भी रुकना पाया,

वो लीले चढ़ कर आया श्याम न रुक पाया,

ठोकर जितनी खाई मैंने अपने जीवन में,

हस्ता था बहार से पर मैं रोता था मन मे,

मेरे मन की पीड़ा को जब कोई पड़ न पाया,

देख मेरी व्याकुलता को बाबा भी रुकना पाया,

वो लीले चढ़ कर आया श्याम न रुक पाया,

कलयुग के अवतारी बाबा भी ये कहते है,

कर्मो के कारन मेरे प्रेमी दुःख सेह्ते है,

अपनी करनी पर मायूसी पर था जब मैं पछताया,

देख मेरी व्याकुलता को बाबा भी रुकना पाया,

वो लीले चढ़ कर आया श्याम न रुक पाया,

जिम्मेदारी थी मुझपे परिवार चलाने की,.

लेकिन क्या थी लाचारी हिमत न बताने की,

हारे नैनो में प्रकाश के जब कटरा बेह आया

देख मेरी व्याकुलता को बाबा भी रुकना पाया,

वो लीले चढ़ कर आया श्याम न रुक पाया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।