रे मन हरि सुमिरन कर लीजै

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रे मन हरि सुमिरन कर लीजै

हरि सुमिरन कर लीजै

हरि सुमिरन कर लीजै

हरिको नाम प्रेमसों जपिये, हरिरस रसना पीजै

हरिगुन गाइय, सुनिय निरंतर, हरि-चरननि चित दीजै

हरि-भगतनकी सरन ग्रहन करि, हरिसँग प्रीति करीजै

हरि-सम हरि जन समुझि मनहिं मन तिनकौ सेवन कीजै

हरि केहि बिधिसों हमसों रीझै, सो ही प्रश्न करीजै

हरि-जन हरिमारग पहिचानै, अनुमति देहिं सो कीजै

हरिहित खाइय, पहिरिय हरिहित, हरिहित करम करीजै

हरि-हित हरि-सन सब जग सेइय, हरिहित मरिये जीजै

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।