हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ

जब बोलें तब रामहि राम

ब्रह्म मुहूरत उठ कर पंछी

प्रभु का ध्यान लगाते हैं ,

चहक चहक मधुमय रामामृत

जंगल में बरसाते हैं

पर हम अहंकार में डूबे

अपने ही गुन गाते हैं ,

गुरु जन के आदेश भूल हम

जीवन व्यर्थ गंवाते हैं

हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ

जब बोलें तब रामहि राम

कितने भाग्यवान हैं हम सब

ऐसा सतगुर पाया है ,

जिसने हमको "राम" नाम का

सहज योग सिखलाया है

माया जंजालों में फँस कर

हमने उसे भुलाया है ,

पर चिड़ियों ने राम मंत्र

जीवन भर को अपनाया है

हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ

जब बोलें तब रामहि राम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।