जंज चली भोलेनाथ दी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आज सब नु हों वधाईयां जंज चली भोलेनाथ दी,

बैल ते बेठा बन के लाडा नैना विच चडेया रंग गाह्डा,

देवी देवते देन वधाईयां जंज चली भोलेनाथ दी,

ढोल खड़क दे वजन नगाड़े,

शिव दे जांजी नच्दे सारे,

हर चेहरे खुशियाँ छैयाँ जंज चली भोलेनाथ दी,

उची लगन जयकारे शिव दे ,

दुनिया चले सहारे शिव दे,

बड़ियाँ शुभ घड़ियाँ आइयाँ,

जंज चली भोलेनाथ दी,

राजू भी हरिपुरियां बोले,.

सुशमा कहन्दी बम बम भोले,

खेडा शिव आप रचाईया जंज चली भोलेनाथ दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।