मेरे राम श्रीराम कुटिया में कब पधारेंगे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मेरे राम श्रीराम कुटिया में कब पधारेंगे ।

बूढी भिलनी कोे प्रभु कब उधारेंगे । मेरे..

नाना पुष्पों से रस्ता सजाऊँगी में,

राम ही राम बस गुनगुनाउंगी में ।

उनका श्रृंगार कर हम सवाँरेंगे,

मेरे राम श्रीराम कुटिया में कब पधारेंगे ।

पैर धोकर के मैं चरणामृत पाऊँगी,

दोनों कर जोड़कर उनको सर नाउंगी ।

काला तिल देके नज़रें उतारेंगे,

मेरे राम श्रीराम कुटिया में कब पधारेंगे ।

रोरी चन्दन लगा उनका वंदन करूँ,

पुष्पहारों से मैं अभिनंदन करूँ ।

दोनों आँखों मैं उनको बैठारेंगे,

मेरे राम श्रीराम कुटिया में कब पधारेंगे ।

भोग बेरों के उनको लगाउंगी मैं,

प्रेम रस से भरे ये बताउंगी मैं ।

कोटि जन्मों को "राजेन्द्र" सवाँरेंगे,

मेरे राम श्रीराम कुटिया मैं कब पधारेंगे ।

धुन :- अल्ला ये अदा कैसी है इन...

"राजेंद्र प्रसाद सोनी"

पनागर ( जबलपुर)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।