के तेरे बिना जी ना लगदा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

की जिक्र करता है दिल सुबह शाम तेरा

गिरतें हैं आँसू तो बनता है नाम तेरा

किसी और को क्यों देखें ये आँखें प्यारे

जब दिल पे लिखा है सिर्फ नाम तेरा

ना छोड़िये तू हाथ भोळे मेरा

के तेरे बिना जी ना लगदा

ना छोड़िये तू हाथ भोळे मेरा

के तेरे बिना जी ना लगदा

मेरे जिणे का सहारा नाम तेरा

के तेरे बिन जी ना लगदा

बात दिल वाली कहीं कही जाए ना

पल भर की भी दूरी सही जाए ना

तेरे संग रौशन

तेरे संग रौशन नहीं तो अँधेरा

के तेरे बिना जी ना लगदा

ना छोड़िये तू हाथ भोळे मेरा

के तेरे बिना जी ना लगदा

प्रीत तेरे संग जोगिया लगाईं है

नाम ज़िन्दगी भी तेरे ही लिखाई है

तू ही चाँद रात तू ही सवेरा

के तेरे बिना जी ना लगदा

ना छोड़िये तू हाथ भोळे मेरा

के तेरे बिना जी ना लगदा

मेरे मन का कमल खिल जानें दे

बस एक बार भोले मिल जानें दे एहसान ये

एहसान ये कमल सिंह लेखक वथेरा प्रयाप्त

के तेरे बिना जी ना लगदा

ना छोड़िये तू हाथ भोळे मेरा

के तेरे बिना जी ना लगदा

मेरे जिणे का सहारा नाम तेरा

के तेरे बिन जी ना लगदा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।