भोले को चढ़ गई भांग

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे भोले को, चढ़ गई भांग, भोला नाचे रे,

और डम डम डंमरू वाजे, कि भोला नाचे रे,

*बम नाचे, भोला बम नाचे ,

मेरे भोले को, चढ़ गई भांग,,,,,,,,,,,,,,,,,

गौरां तोड़ लाई, हरे धतूरे ,

और तोड़ लाई भांग, भोला नाचे रे ,

मेरे भोले को चढ़ गई भांग,,,,,,,,,,,,,,,,,

गौरां ने पीसा, हरा धतूरा

और पीस लाई भांग, भोला नाचे रे

मेरे भोले को, चढ़ गई भांग,,,,,,,,,,,,,,,,,

भोला ने खाए, हरे धतूरे

ऊपर से पी लई भांग, भोला नाचे रे

मेरे भोले को, चढ़ गई भांग,,,,,,,,,,,,,,,,,

भोले को चढ़ गए, हरे धतूरे

और चढ़ गई भांग, भोला नाचे रे

मेरे भोले को, चढ़ गई भांग,,,,,,,,,,,,,,,,,

ब्रह्मा देखे, विष्णु देखे

और नारद, हँसे दे के ताल, भोला नाचे रे

मेरे भोले को, चढ़ गई भांग,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।