कमलाकांत प्रभु कमलनयन स्वामी

पारंपरिक
श्री राम भजन विष्णु भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

कमलाकांत प्रभु कमलनयन स्वामी,

घट घट वासी अंतर्यामी ।

नारायण दीनदयाल, जय जगदीश हरे ।

निज भक्तन के प्रतिपाल, जय जगदीश हरे ॥

जय जय राम राजा राम, जय जय राम राजा राम

प्रभु अनुसरण जेहि जन कीना ।

नाथ परमपद तिन कर दीना ॥

भक्ति भाव की ऐसी धारा ।

जो डूबे सो उतरे पारा ॥

कलियुग केवल नाम अधारा ।

हरी सुमिरन हरी कीर्तन सारा ॥

नारायण दीनदयाल, जय जगदीश हरे ।

वितरसि दिक्षुरनि दिक्पति कमनीयं

दशमुख मौली बलिम रमनीयं ॥

केशव धृत राम शरीर जय जगदीश हरे ।

हरी हरते जन की पीड़ जय जगदीश हरे ॥

जय जय नारायण नारायण नारायण

हरी हरी नारायण नारायण नारायण

नारायण दीनदयाल, जय जगदीश हरे ।

निज भक्तन के प्रतिपाल, जय जगदीश हरे॥

शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं ।

विश्वाधारं गगनसदृश्यम मेघवरणं शुभांगम ॥

लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगमयं ।

वंदे विष्णु भवभय हरं सर्व लोकेक नाथं ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।