चेला वोही चीज लाना रे गुरु ने मंगाई

संत कबीर
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

चेला वोही चीज लाना र गुरु ने मंगाई

पहली भिक्षा अन की लाना

नगर बस्ती के पास ना जाना

चलती चक्की तज कर लाना

झोली भर के लाना र गुरु ने मंगाई

चेला वोही चीज...................

दूजी भिक्षा जल की लाना

कुआं बावड़ी के पास ना जाना

नदी नाला तज कर लाना

कमंडल भर के लाना र गुरु ने मंगाई

चेला वोही चीज.....................

तिजी भिक्षा लकड़ी लाना

झाड़ जंगल के पास ना जाना

अाली सुखी देख के लाना

गट्ठर बांध लाना र गुरु ने मंगाई

चेला वोही चीज..................

चोथी भिक्षा अग्नि लाना

चूल्हा भट्टी के पास ना जाना

कहत कबीर सुन र चेला

ठठेरा भर के लाना र गुरु ने मंगाई

चेला वोही चीज लाना र गुरु ने मंगाई

लिरिक्स by पुरानी कथा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।