ज़रा सोचो कन्हैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ज़रा सोचो कन्हैया ज़माना क्या कहेंगा

तेरे होते हुए भी कहीं जाना पड़ेगा

ज़रा सोचो कन्हैया..........

सिवा तेरे कभी भी ना माँगा है किसी से

मेरी तो हर ज़रूरत हुई पूरी तुम्ही से

कहीं मैं और जाऊं तो क्या अच्छा लगेगा

तेरे होते हुए भी कहीं जाना पड़ेगा

ज़रा सोचो कन्हैया..........

मेरी हस्ती तुम्ही से ये सारे जानते हैं

तुम्हारे नाम से ही मुझे पहचानते हैं

हँसे मुझ पर ज़माना तुम्हे कैसा लगेगा

तेरे होते हुए भी कहीं जाना पड़ेगा

ज़रा सोचो कन्हैया..........

कमी मुझमें है कोई तभी तो मैं हूँ हारा

भूल कर दोष मेरा मुझे दे दो सहारा

वरना हारे का साथी कौन तुमको कहेगा

तेरे होते हुए भी कहीं जाना पड़ेगा

ज़रा सोचो कन्हैया..........

जियूं जब तक मैं सोनू ना छूटे साथ तेरा

सिवा तेरे कहीं भी ना फैले हाथ मेरा

गई जो लाज मेरी ये कैसे तू सहेगा

तेरे होते हुए भी कहीं जाना पड़ेगा

ज़रा सोचो कन्हैया..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।