मेरे घर आऔ जी

पारंपरिक
अन्य आरती गुरुदेव भजन aarti
॥ पावन पाठ ॥

"एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा"

होली खेलो मेरे साजना तन मन धन बारुंगी

मेरे घर आऔ जी पाहना तेरी आरती उतारूंगी

पिछले जन्मों से मैं तेरी दासी

परम पुरुख मेरे प्रभ अविनाशी

पानी में चंदा की ज्योति को निहारुँगी

होली खेलो मेरे साजना तन मन धन सब बारुंगी

मेरे घर आऔ जी पाहना तेरी आरती उतारूंगी

लाल गुलाल सजन मेरी अखियाँ

हस हस बातें करे मेरी सखियाँ

तेरी तस्वीर मेरे साहिब आँखों में उतारूंगी

होली खेलो मेरे साजना तन मन धन सब बारुंगी

मेरे घर आऔ जी पाहना तेरी आरती उतारूंगी

मुझे दुनिया की हुशियारी ना आबे

बाग़ में पंक्षी शोर माचवे

तेरे हुक्म में सतगुरु जिंदगानी गुजारुंगी

होली खेलो मेरे साजना तन मन धन सब बारुंगी

मेरे घर आऔ जी पाहना तेरी आरती उतारूंगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।