लाया थारी चुनरी करियो माँ स्वीकार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ल्याया थारी चुनरी , करियो माँ स्वीकार,

इमें साँचा साँचा हीरा और मोतियों की भरमार !!

चुनरी को रंग लाल चटक है, तारा भी चिपकाया माँ ,

बढियां पोत मंगायो जामे, गोटो भी लगवाया माँ ,

थे तो ओढ दिखाओ मैया,थारो मानंगा उपकार !!

ल्याया थारी चुनरी...

बस इतनी सी कृपा कर दे सेवा में लग-जावाँ माँ ,

म्हने तू इ लायक करदे ,चुनरी रोज चदावा माँ ,

बस टाबरिया पर बरसे , माँ हरदम थारो प्यार !!

ल्याया थारी चुनरी...

एक हाथ स भक्ति दीजे , एक हाथ स शक्ति माँ ,

एक हाथ स धन दौलत और एक हाथ स मुक्ति माँ,

तू तो हर हाथां स दीजे , माँ थारा हाथ हज़ार !!

ल्याया थारी चुनरी...

गर तू थारो बेटो समझे, सेवा बताती रह्ज्ये माँ,

'बनवारी' क्यां लायक समझो , काम उडाती रह्य्जे माँ,

म्हे तो रात-दिना बेठ्या हाँ , थारी सेवा में तैयार !!

ल्याया थारी चुनरी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।