हमारे दो ही रिश्तेदार इक है शक्ति

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हमारे दो ही रिश्तेदार,हमारे दो ही रिश्तेदार

इक है शक्ति आत भवानी,

दूजा भोले नाथ सरकार,

हमारे दो ही रिश्तेदार

माँ गोरा है आद भवानी शिव है देव निराले,

डम डम डमरू भजाने वाले बाबा भोले भाले,

सब की मुरादे पूरी करते सब के भरे भंडार,

हमारे दो ही रिश्तेदार...

ऊंचे पर्वत बैठ भवानी सब की आस बुजाये,

कैलाश पर्वत पे भोले बाबा मंद मंद मुस्काये,

शिव शक्ति का रूप निराला करता है उधार,

हमारे दो ही रिश्तेदार

तन पे भभूति गले में माला शिव योगी का रूप निराला,

दुष्टो का संगार माँ करती चंडी रूप माँ बन के ज्वाला,

महिमा बड़ी निराली जग में,अरे करदे भव से पार,

हमारे दो ही रिश्तेदार

आओ मिलकर शिव गोरा की जय जय कार बुलाये ,

छोड़ के झूठी दुनिया दारी मन की बात सुनाये,

संजीव भी चरणों में है बैठा अरे करता यही पुकार,

हमारे दो ही रिश्तेदार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।