जैसा रिश्ता जीव जगत में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जैसा रिश्ता जीव जगत में तन तू और प्राण का,

वैसा रिश्ता है जगत में भक्त और भगवान का

भक्त बिन भगवान अधूरा प्रभु बिन न हो काम पूरा,

रौशनी बिन सूरज अधूरा चाँदनी बिन चाँद चकोरा,

जैसा रिश्ता जीव जगत में गुरु और ज्ञान का,

वैसा रिश्ता है जगत में भक्त और भगवान का

बिना धुप के सुख अधूरा संतोषी बिन भूख न पूरा,

मधुर भाव बिन प्रीत अधूरा लये ताल बिन गीत अधूरा,

जैसा रिश्ता जीव जगत में मात पिता संतान का,

वैसा रिश्ता है जगत में भक्त और भगवान का

बिन राधे के श्याम अधूरा सिया बिन श्री राम अधूरा ,

राधे श्याम और सिया राम का रिश्ता जैसे श्याम सवेरा,

जैसा रिश्ता जीव जगत में मृत्यु और जान का,

वैसा रिश्ता है जगत में भक्त और भगवान का

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।