नैन निरंतर मूरत जागे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ तेरा दरबार जिसको शोभा जग में न्यारी रे,

नैन निरंतर मूरत जागे सूरत प्यारी रे तू लागे प्यारी रे,

जो दुख्ररो को लगा मत वाले दर्शन अतियां तरसे रे,

नैनो में करुना बरसे जो मन संतोष से हर ले रे,

अमृत बरसे द्वारे माँ तुम तो दानी रे,

नैन निरंतर मूरत जागे सूरत प्यारी रे तू लागे प्यारी रे,

मातायो पर मुकट मनी को कुंडल काले हल्के रे,

रतन सिंगासन मात विराजे रत ली जे हल चल रे,

गले मोतियाँ की माले डाले बंद हजारी रे तू लागे प्यारी रे,

नैन निरंतर मूरत जागे सूरत प्यारी रे तू लागे प्यारी रे,

इक हाथ माँ कंगन धारे दूजे त्रिशूल धारे रे,

अभय दान देती तू माँ संतोषी हित कारी रे,

चोथे हाथ कटोरा देके दुनिया सारी रे बुलादे प्यारी रे,

नैन निरंतर मूरत जागे सूरत प्यारी रे तू लागे प्यारी रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।