जिन्हो घर झुमते हाथी

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॥ पावन पाठ ॥

जिन्हो घर झुमते हाथी , हजारों लाखों थे साथी

उन्हीं को खा गई माटी , तु खुशकर नींद क्यों सोया

नकारा कुचका बाजै , कि मारु मौत का बाजै

ज्यों सावन मेघला गाजै

तु खुशकर ...

जिन्हो घर लाल और हीरे , सदा मुख पान के बीड़े

उन्हीं को खा गए कीड़े

तु खुशकर ...

जिन्हों घर पालकी घोड़े , जरी जखफ्त के जोड़े ,

वहीं अब मौत ने तोड़े

तु खुशकर ...

जिन्हों संग नेह था तेरा , किया उन खाक में डेरा,

न फिर करने गये फेरा

तु खुशकर...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।