कुञ्ज माँगा नहीं

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॥ पावन पाठ ॥

कुझ मंगना नही साईंया तेरे बाजो मैं तेरे कोलो तेनु मंगना,

जग सामने वे माली सारे जग दा ते फेर आसा तेनु मंगना,

कुझ मंगना नही साईंया तेरे बाजो मैं तेरे कोलो तेनु मंगना,

सुख दुःख गम ख़ुशी सब तेरी माया है,

माया विच तू है सारा जग भरमाया है,

रंग सारे ने कचे इस जग दे वे रंगा विच तेरे रंगा,

कुझ मंगना नही साईंया तेरे बाजो मैं तेरे कोलो तेनु मंगना,

जे तू मिल जावे सहनु रहे कोई थोड न,

जिन्दगी च फेर पेनी कड़े कोई लोड न,

अज मंगना है आखिरी वारि मैं मंगनो भी नहियो संगना,

कुझ मंगना नही साईंया तेरे बाजो मैं तेरे कोलो तेनु मंगना,

तेरेया विछोड़ेया दे सप जेहरीले ने,

सुध बुध हर लेनदे बड़े ही नशीले ने,

छेती ले ले खबर साहिल दी तू,

वरना एहना ने डंगना,

कुझ मंगना नही साईंया तेरे बाजो मैं तेरे कोलो तेनु मंगना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।