पधारो मोरे अंगना श्री गणेश

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

लम्बोदरं परम सुन्दरमेकदन्तं,

पीताम्बरं त्रिनयनं परमं पवित्रम्

उद्यद्दिवाकर निभोज्ज्वल कान्ति कान्तं,

विध्नेश्वरं सकल विध्नहरं नमामि

पधारो मोरे अंगना श्री गणेश

करो पूरण काज श्री गणेश

रिद्धि सिद्धि के दाता तुम हो

सद्बुद्धि के प्रदाता तुम हो

सारे हर लो सबके क्लेश

सबसे पहले तेरी पूजा

तुमसे बड़ा कोई देव ना दूजा

तेरा सुंदर गजानन भेष

मोदक तुमको खूब सुहावे

रुचि रुचि करके भोग लगावे

दो सौरभ को कुछ शेष

स्वर ÷ पं. सौरभ कृष्ण शास्त्री ( 9559874123)

जय सच्चे की

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।