तु दयालु दीन हो

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॥ पावन पाठ ॥

तु दयालु दीन हौ ,

तु दानि हौ भिखारी,

हौ प्रसिद्ध पार्टी , तु पाप पुंज हारी,

नाथ तु अनाथ को , अनाथ कौन मोसो

मो समान आरत नहीं , आरति हर तोसों,

ब्रह्म तु हौ जीव तु है , ठाकुर हौ चेरो

तात मात गुरु सखा , तु सब विधि हि तु मेरो

तोहि मोहि नाते अनेक , मानिए जो भावै

ज्यों त्यों तुलसी कृपालु , चलन - सरन पावै

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।