मेरे कान्हा आ जाओ ना अंखिया नीर बहाए

अभिषेक चौरसिया
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे कान्हा आ जाओ ना

अंखिया नीर बहाए, तुम बिन रह नहीं पाए

याद करो तुम काहना, वो बचपन की बाते

गोएं चराना, माखन चुराना, पनघट चीर चुराते,

हम को बहुत सताते,

मेरे काहना आ जाओ ना,

अंखिया नीर बहाए, तुम बिन रह नहीं पाए

वो यमुना की लहरें, वो मधुबन की छैया

रास रचाना, बंसी बजाना, पल पल याद दिलाएं,

पल पल हम को सताएं...

मेरे काहना आ जाओ ना,

अंखिया नीर बहाए, तुम बिन रह नहीं पाए

जनम जनम की डोरी, तुम संग श्याम बंधी है

तुम संग काहना, रिश्ते हैं सारे, तुम संग हैं सारे नाते

फिर क्यूँ इतना सताते...

मेरे काहना आ जाओ ना,

अंखिया नीर बहाए, तुम बिन रह नहीं पाए

लौट के आजा तू गोकुल, याद बहुत तडपाए

रात ना निंदिया, दिन को ना चैना, नैनो को न हमरे आए

नयना नीर बहाए...

मेरे काहना आ जाओ ना,

अंखिया नीर बहाए, तुम बिन रह नहीं पाए

स्वर : अभिषेक चौरसिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।