तेरा किसने किया श्रृगारं भोले सावरिया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओ तेरा किसने किया श्रृगारं भोले सावरिया

तुम्हें किसने लगाया गुलाल भोले सावरिया

ओ तेरा किसने किया श्रृगारं

जटाजूट माथे पे चंदा अदभुत रूप निराला हैं

अदभुत रूप निराला बाबा अदभुत रूप निराला

गल सर्पो का हार तेरे गल ओ भोले सावरिया।

तेरा किसने किया श्रृगारं

तन पे भस्म लगाई तेने कान में कुण्डल पाया है जी

ब्रह्मा विष्णु समझ ना पाए ऐसा खेल रचाया है जी

जग सिरजनहार ओ मेरे जग के सिरजनहार भोले सवारिया

तेरा किसने किया श्रृगारं

बैल सवारी करे रे बाबा डमरू ऐसा बजावे रे

तीन लोक में डंका बाजे ऐसा दर्श दिखावे रे

रोहित भी तेरा गुण गावे तुम को शीश निवाववे रे

सब का किया उधार भोले सावरिया तेने

तेरा किसने किया श्रृगारं भोले सावरिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।