चोसठ जोगिनी रे देवी रे देवळिये रमजाय

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चोसठ जोगिनी रे देवी रे देवळिये रमजाय

घूमर घालनी रे देवी रे देवळिये रमजाय

हंस सवारी कर जगदंबा ब्रम्हाळ रूप बनायो

चार वेद मुख चार कहिजे, चार वेद जस गायो ||१|| घूमर

गरुड़ सवारी कर जगदंबा विष्णु रूप बनायो

गदा पदम संग चक्र बिराजे, मधुबन रास रचायो || घूमर

बैल सवारी चढ़ जगदंबा शिवजी रूप बनायो

जटा मुकुट मै गंगा बिराजे. शेष नाग लीपटायो || घूमर

सिह सवारी कर जगदंबा शक्ति रूप बनायो

सियाराम जी करे हे स्तुति, भक्त मंडल जस गायो || घूमर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।