रोटी को नी भावे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रोटी को नि भावे कहिया खाऊ रे सांवरियां,

थारे पुरवा वे अखिया भर जावे महारा सांवरियां,

नींदर भी न आवे काइयाँ सोउ रे सांवरियां,

थारी पुरवा वे आखा भर जावे महारा सांवरियां,

रोटी को नि भावे कहिया खाऊ रे सांवरियां,

पीहरिये में घर का सागे आती थी थारे गांव में,

सांसरिये में कोई न जाने कानहडो थारे नाम ने,

देखो बेड़ी जकड़ गई है बाबा मेरे पाँव ने,

यादली में थारी मैं तो रोउ रे सांवरिया ,

थारी पुरवा वे आखा भर जावे महारा सांवरियां,

रोटी को नि भावे कहिया खाऊ रे सांवरियां,

काम काज में मन नहीं लागे ,

दिखे खाटू धाम री,

आखड़लिया के श्याम आवे थारो मोटो श्याम री,

कद सी आ सी मेरो बुलावो दीपू सुभहो श्याम रे,

बातड़ली में थारी बैठ जाऊ रे सांवरियां,

थारी पुरवा वे आखा भर जावे महारा सांवरियां,

रोटी को नि भावे कहिया खाऊ रे सांवरियां,

स्वाती चूरमा भोग बनाई घी और बुरा भान के,

मेरो आलो कब है सीजी खेह आ जाओ छाल के,

हरष करि पत मेला समजे सांझ मुंग की दाल रे,

भोग लगा जा पनकी खेयू रे सांवरियां,

थारी पुरवा वे आखा भर जावे महारा सांवरियां,

रोटी को नि भावे कहिया खाऊ रे सांवरियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।