जगत सेठानी लागि रे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन रानी सती दादी भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चुनड़ी जयपुर से मंगवाई झुंझुनू वाली को उड़ाऊ,

चुनड़ी दादी के मन भाई ओड चुनड दादी मुस्काई,

सवर के सजके लगती सोहनी सोहनी मोती सेठानी,

हीरे चमके मोती चांदी बैठी सिंगासन दादी,

जगत सेठानी लागि रे रानी महारानी लागि रे

दो लखा गल हार पहनाया नवरत्नों का टिका,

दादी के मुखड़े के आगे ये चंदा भी फीका,

हाथ में कंगना पाँव में पायल की छनकार मत वाली,

हीरे चमके मोती चांदी बैठी सिंगासन दादी,

जगत सेठानी लागि रे रानी महारानी लागि रे

लाल रंग का पेहरे जोड़ा लेहरे लाल चुनरियाँ,

लाल रंग की देख के शोभा ठहरे नहीं नजरियां,

भोली मूरत प्यारी सूरत माँ की शान निराली,

हीरे चमके मोती चांदी बैठी सिंगासन दादी,

जगत सेठानी लागि रे रानी महारानी लागि रे

रंग बिंरंगा फुला से दादी दरबार सजाया,

इत्र ने अपनी खुशबु से खूब इसे महकाया,

दयालु दास किरपालु दादी कुंदन ये है दिल वाली,

हीरे चमके मोती चांदी बैठी सिंगासन दादी,

जगत सेठानी लागि रे रानी महारानी लागि रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।