अरदास यही साईं मुझे सेवा में अपनी लगा ले

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अरदास यही साईं मुझे सेवा में अपनी लगा ले,

कुछ और न मैं चाहू मुझे चरणों की दासी बना ले,

अरदास यही साईं मुझे सेवा में अपनी लगा ले,

बंधन कुछ एसा बंध जाए,

जन्मो जन्मो तक टूटे नही,

देह्लील तेरी सतगुरु प्यारे सदियों सदियों तक टूटे नही,

चाहू मैं दया इतनी मुझे तू शरण में अपनी वसा ले,

अरदास यही साईं मुझे सेवा में अपनी लगा ले,

दुनिया की सभी खुशिया क्या है,

सब धोखा है सब माया है,

इक सपना है चलता फिरता,

जिसने सब को भरमाया है,

सच की सुरत दिखला,

सभी माया के परदे हटा ले,

अरदास यही साईं मुझे सेवा में अपनी लगा ले,

नाकाम उमीदो पर दाता अपनी रहमत की मोहर लगा,

फरयाद यही विनती है यही शरणागत की दोषों को बुला,

मर जायेगे जीते जी,

हमे दामन में अपने छुपा ले,

अरदास यही साईं मुझे सेवा में अपनी लगा ले,

सागर में कोई नैया जैसे कुछ एसीही अपनी कहानी है,

साहिल दीखता नही दूर तलक हर तलक जो बनता पानी है,

हमने जीवन नैया को साईं कर दी तेरे हवाले,

अरदास यही साईं मुझे सेवा में अपनी लगा ले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।