मात पिता सुत नारी

-स्वामी सदानन्द जोधपुर
श्री राम भजन विष्णु भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मात-पिता सुत नारी,ओर इस झूठी दुनिया दारी को

छोङ कर के एक जाना,होगा की नही

क्यो भूले जीवन के राही,दूर कही तेरी मंजिल

सजी धजी यहा रह जाएगी,दुनिया की झूठी महफिल

इस महफिल को पार पाना,होगा की नही

लख चोरासी भटकत तुने,पाया है मानव तन को

राम सुमिरले सुकृत करले,सफल बना इस जीवन को

इस जीवन को सफल बनाना,होगा की नही

क्यो करता है मेरी-मेरी,कोई चीज नही तेरी

कंचन जैसी सुन्दर काया,बज जाए मिट्टी की ढेरी

अन्त समय तुझको पछताना,होगा की नही

जिसने जनम लिया है जग मे,एक दिन उनको जाना है

इक आए इक जाए जगत से,दुनियां मुसाफिर खाना है

सदानन्द कहे हरि गुण गाना,होगा की नही

रचनाकार:-स्वामी सदानन्द जोधपुर

M.9460282429

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।