डूबतो को बचा लेने वाले मेरी नैया है तेरे हवाले

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॥ पावन पाठ ॥

डूबतो को बचा लेने वाले,

मेरी नैया है तेरे हवाले ।

लाख अपनों को मैंने पुकारा,

सब के सब कर गए हैं किनारा ।

और कोई ना देता दिखाई,

सिर्फ तेरा ही अब तो सहारा ।

कौन तुझ बिन भवर से निकाले,

मेरी नैया है तेरे हवाले...

जिस समय तू बचाने पे आए,

आग में भी बचा कर दिखाए ।

जिस पे तेरी दया दृष्टि होवे,

कैसे उसपे कोई आंच आए ।

आंधियो में भी तू ही संभाले,

मेरी नैया है तेरे हवाले...

बिन तेरे चैन मिलता नहीं है

फूल आशा की खिलता नहीं है ।

तेरी मर्जी बिन इस जहा में,

एक पत्ता भी हिलता नहीं है ।

तेरे बस में अँधेरे उजाले,

मेरी नैया है तेरे हवाले...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।