हिन्डो तो घला दयो

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी,

सतगुरु म्हारा, हिण्डे-हिण्डे सुरता नार,

काया तो नगरिये मे सतगुरु म्हारा आमली जी,

सतगुरु म्हारा छायी छायी च्यारुँ मेर,

अगर-चंदन को सतगुरु म्हारा पालणो जी,

सतगुरु म्हारा रेशम डोर घलाय ,

पाँच सखी मिल पाणीड़े न निसरी जी,

सतगुरु मेरा पाँचू ही एक उणियार ,

नाथ गुलाब से सतगुरु म्हारा विनती जी,

सतगुरु मेरा गावै-गावै भानीनाथ,

बोल नाथ जी महाराज की जय

संपादक:-विजय डिडवानिया

सरदारशहर

9511539933

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।