अपना कोई नहीं अपना तो श्याम संवारा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अपना कोई नहीं अपना तो श्याम संवारा,

जिसको पगले तू समजे है अपना दुनिया है इक सपना,

मतलब की सब दुनिया दारी बस वो ही है अपना,

अपना कोई नहीं अपना तो श्याम संवारा,

फिर दिल में वसा है तू ही तू ही,

टूटे मन का भरोसा बस इक तू ,

विरहा में तेरे सुना ये जीवन आगे तू मेहकाना श्याम,

अपना कोई नहीं अपना तो श्याम संवारा,

मन अब भी उलझा अपनी में उलझा दुनिया में,

ठोकर खाई उसी झूठी दुनिया में,

खुद को ही मैं ढूंढ न पाउ इतना था उलझा

अपना कोई नहीं अपना तो श्याम संवारा,

प्यारे भगतो का तू ही दिलदार है,

जग में ऊंची सभी से तेरी सरकार है,

कौशिक तेरा दास सांवरिया इसको तू न बुलाना

अपना कोई नहीं अपना तो श्याम संवारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।