जो मुझमें बोलता है मैं नहीं हूँ

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॥ पावन पाठ ॥

जो मुझमें बोलता है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

जो मुझमें बोलता है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ

जलवा दिखा के यार ने दीवाना कर दिया.

खुद शम्मा बन गए हमे परवाना कर दिया.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं कहाँ हूँ तू ही तू है सब तेरा ही प्रकाश है

जो मुझमें बोलता है मैं नहीं हूँ

जलवा जलवा जलवा जलवा यार का जलवा

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

जिसे देखो जिसे देखो वो आमादा है घर का घर लुटाने पर

जो मुझमें बोलता है मैं नहीं हूँ

जलवा जलवा जलवा जलवा यार का जलवा

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

ये नापूछो कैसे दीवाने बने तुमने जिसे चाहा बही दीवाने बने है

जो मुझमें बोलता है मैं नहीं हूँ

जलवा जलवा जलवा जलवा यार का जलवा

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

मीरा ने जहर का प्याला पिके कहा ये उसकी शान है ये मैं नहीं हूँ

जो मुझमें बोलता है मैं नहीं हूँ

जलवा जलवा जलवा जलवा यार का जलवा

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

कहा मंसूर ने सूली पर चढ़ के अनहलद की सदा है मैं नहीं हूँ

जो मुझमें बोलता है मैं नहीं हूँ

जलवा जलवा जलवा जलवा यार का जलवा

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

मेरी आँखों की पुतली मैं तो देखो -2

वही जलवा नुमा है मैं नहीं हूँ

जो मुझमें बोलता है मैं नहीं हूँ

जलवा जलवा जलवा जलवा यार का जलवा

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

आँखों में तेरी कोई करिश्मा जरुर है

तुझे देख ले जो वो तडफता जरुर है

जो मुझमें बोलता है मैं नहीं हूँ

जलवा जलवा जलवा जलवा यार का जलवा

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

तुम्हारी नजरे कर्म जिस पर आम हो जाए

ज़माने भर में वो आलीमका हो जाए

गुलाम जिस को तुम बना लो अपना

उस गुलाम की दुनिया गुलाम हो जाए

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

किसी परदे का पर्दा हूँ किसी जलवे का जलवा हूँ

मुझे किसी दुनिया से क्या मतलब मैं अपनी आप दुनिया हूँ

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

वो खिड़की खोल के देखे है मेरी तरफ

वो खिड़की खोल के देखे है अम्बर से मेरी तरफ

उसकी नजर मेरी तरफ मेरी नजर उसकी तरफ

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

मेरी आखों में जन्नत है मैं उसकी आँखों का नूर हूँ -2

वो नूर का पर्दा है तो मैं तस्वीरे नूर हूँ

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

जो मुझ में बोलता है मैं नहीं हूँ

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

कोई परदे को यूँ सरका गया है -2

खुद को देखने खुद आ गया है -2

निगाहों से कोई उतरा है दिल में

तड़फ करके मुझे तडफा गया है

मेरे परदे आके और कोई तमाशा कर रहा है मैं नहीं हूँ *1-2-3

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

ये तेरी जलवागरी दुनिया तो खामोश है -2

आँख बंद थी तेरे दीदार मैं इतना तो मुझ को तो होश है

उठा के शीशे को जो मैंने देखा ये कोई और है ये मैं नहीं हूँ

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

परदे में बैठे पिया जगमग ज्योति होय

अगम अगोचर अजर अमर भेद ना जाने कोय -2

बाग़ बागन खोजे बहुत सखी वो ना आये हाथ -2

जहाँ जहाँ मैं फिरी वो था मेरे साथ साथ

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ.

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

जो मैं होता खता मुझसे भी होती

मुझे खटका ही क्या मैं नहीं हूँ

जो मुझ में बोलता है मैं नहीं हूँ

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

नचाता है मुझे जो गलियारों में

नचाता है मुझे जो बाजारों में

किसी का इश्क है मैं नहीं हूँ

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ.

आँखों मेने धोया तो उजला उजला देखा

जीभ को धोया तो मैंने प्यार से बोलना सीखा

कानों को धोया तो सजन तेरी ही आवाज आई

प्रेम जल से दिल धोया तो तेरी गली मैंने पाई

किशी का इश्क है ये मैं नहीं हूँ

नचाता हैं मुझे जो गलियारों में

किसी का इश्क है ये में नहीं हूँ

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

प्रेम गंगा तट की सुबहा प्रेम यमुना तट की शाम है

प्रेम सिद्धों की समाधि प्रेम गुरुओं का ज्ञान है

प्रेम मीरा के प्याले में झाकता हुआ घनश्याम है

प्रेम की खेती उगाना सबसे मुश्किल काम है

प्रेम इस संसार में सबसे बड़ा दान है

तू प्रेम को कहता है बंधन तुझसे बड़ा कोन नादान है

प्रेम तो परब्रह्म है प्रेम परम धर्म है प्रेम है उपासना

तप्सियों की साधना प्रेम तत्व ज्ञान है

दुखों का समाधान है प्रेम वेदों की ऋचा

देवताओं की प्रेम मुस्कान है

तूने ढाई अक्षर पढ़ा नहीं तुझे नाचना आता नहीं

तू प्रेम मैं पागल हुआ नहीं तो ऐसा कहता नहीं

नाचता हैं मुझे जो बाजारों किसी कह इश्क है ये मैं नहीं हूँ

जो लिपटा है तुमसे आके

वो मेरे साया होगा वो मैं नहीं हूँ

मैं नहीं हु मैं नहीं हूँ मैं नहीं हु

यहाँ से वहा तक तू ही तू हैं

फकत तू ही तू है मैं नहीं हूँ

फुलसंदे बाले बाबा ये कहके चुप हो गए

ना वो ज्ञानी ना पंडित ना पुजारियों को मिला

जिसने इस रूह के चिराग को उसके सामने धर दिया

उसने अपना हाथ उसके सर पर धर दिया

जो मुझमें बोलता है में नहीं हूँ मैं नहीं हूँ

मेरी दीवानगी है मैं नहीं हूँ

जलवा जलवा जलवा जलवा यार का जलवा

ये जलवा यार का है मैं नहीं हूँ

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हे परमेश्वर ! एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।