ढ़ोल वजावांगे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ढ़ोल वजावांगे ढ़ोलिया ढ़ोल वजावांगे

वेडे दे विच जागा साढ़े भेंटा गावांगे

रल मिल सारे वेढ़े वालया माँ दा यगण रचाया

हर बन्दे ने वद चड के हैं माँ तो करम कमाया

जागे वाली रात हैं आई भंगढे पावांगे

ढ़ोल वजावांगे ढ़ोलिया ढ़ोल वजावांगे

सारे भगता ने हैं मिल के माँ दी जोत जगाई

जोत प्यारी दा दर्शन कर सारे देन वधाई

ज्योति अगे शीश नवाके मुरादा पावांगे

ढ़ोल वजावांगे ढ़ोलिया ढ़ोल वजावांगे

राहुल तेरा बचडा माये संगता दे नाल आया

वाजे ढ़ोलक दे नाल ओने तेरा ही गुण गाया

सिर ते ओंदे हथ रख के माँ कण्ठ मिथासा दे

ढ़ोल वजावांगे ढ़ोलिया ढ़ोल वजावांगे

Singer Rahul Goswami

9034156356

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।