गैरों की तरहा

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गैरों की तरह हम से नजरे न चुरा साईं,

अपनों की तरह हमको सीने से लगा साईं,

गैरों की तरह हम से नजरे न चुरा साईं,

विश्वाश यही दिल में दिन रात पनपता है,

दुनिया के हर इक दुःख की इक तू है दवा साईं,

गैरों की तरह हम से नजरे न चुरा साईं,

तकदीर के मारो की तकदीर बदल ता तू,

आँखों से भी देखा है नही सिर्फ सुना साईं,

गैरों की तरह हम से नजरे न चुरा साईं,

दुनिया में कही हमको आया है न आएगा,

आनदं जो चरणों में तेरे है मिला साईं,

गैरों की तरह हम से नजरे न चुरा साईं,

हाथो में तेरे देदी हमने जीवन डोरी,

अब मर्जी है तेरी जैसे भी नचा साईं,

गैरों की तरह हम से नजरे न चुरा साईं,

सब दुखियां मन पे खुशियों की मोहर लगे,

साहिल ने आज यही मांगी है दुआ साईं,

गैरों की तरह हम से नजरे न चुरा साईं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।