महादेवा महादेवा भूतों के राजा देवों के देवा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिवाय शिवाय शिवाय शिवाय

कान कुण्डल तेरे गले में काला नागा

हाथ में त्रिशूल तेरे त्रिशूल पे डमरू साजा

सर से बहती गंगा सर पे है तारा चंदा

तुझसे है दुनियाँ चलती तू है दुनिया का राजा

दू है दुनियाँ का राजा

महादेवा महादेवा भूतों के राजा देवों के देवा

तू ही अनंत है तू ही चण्डाल है रे

महाकाल है रे तू ही नागेश्वराया

सोमनाथ या महादेवा

तू ही आकाश है रे तू ही पाताल है रे

तू ही तो जीवन है तू ही तो काल है

सबको दिया तूने फिर भी सवाल है

महादेवामहादेवा भूतों के राजा देवों के देवा

महादेवामहादेवा भूतों के राजा देवों के देवा

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नमः शिवाय॥

महादेवामहादेवा भूतों के राजा देवों के देवा

महादेवामहादेवा भूतों के राजा देवों के देवा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।