जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय रामदेव अवतारी, लीले घोड़े वाली असवारी

अजमल घर अवतारी, जय हो जय हो म्हारा बाबा थारी

जग घूमिया थारे जैसा ना कोई रूनिचेरा नाथ थारे जैसा ना कोई

सब पे दया तू रखना......

जग घूमिया थारे जैसा ना कोई रूनिचेरा नाथ थारे जैसा ना कोई

द्वारका रा नाथ थारे जैसा ना कोई जग घूमिया थारे जैसा ना कोई

तू ही तो है राम म्हारो तू ही घनश्याम रे

तू ही वाहेगुरु म्हारो तू ही अल्ला नाम रे

थाने तो सब ही ध्यावे.............

थाने तो सब ही ध्यावे हिंदू मुसलमान रे

हिंदू कहे बाबा थाने पीर मुसलमान रे

प्याला मक्का सू माँगाया तू ही, पाचो पीरा ने ज़ीमाया तू ही

घोड़ो आकाशा उड़ाया तू ही, पग कुंकु रा मनडाइया तू ही

सब पे दया तू रखना......

जग घूमिया थारे जैसा ना कोई रूनिचेरा नाथ थारे जैसा ना कोई

द्वारका रा नाथ थारे जैसा ना कोई जग घूमिया थारे जैसा ना कोई ||1||

अमरकोट रानी नेतल प्रकटिया, उनका हामीर माही रूनिचेरा धनिया

पगा सू लाचार ........ रानी ने पगल्या दिराया

रानी नेतल थाने हृदय मे बसाया

ब्याह रानी से रचाया थे ही, रानी रूनिचे मे लाया थे ही

मन प्रेम बसाया थे ही. दातार कहाया थे ही

सब पे दया तू रखना......

जग घूमिया थारे जैसा ना कोई रूनिचेरा नाथ थारे जैसा ना कोई

द्वारका रा नाथ थारे जैसा ना कोई जग घूमिया थारे जैसा ना कोई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।