दिल लूट के ले गया छलिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन में बस के मन बसिया दिल लूट के ले गया छलिया

कहे रो रो राधा कैसी ये रुस्वाई है

जिस दिन से गया तू नींद मुझे ना आई है

मन में बस के मन बसिया

सुन कान्हा तेरी याद में रोती रहती हूँ

तेरे दिए ख्वाब के दर्द को हर पल सेहती हूँ

क्या प्यार का मतलब श्याम जुदाई है

जिस दिन से गया तू नींद मुझे ना आई है

वो मधुर मुरलिया कानो से टकराती थी

खुश होकर पाँव की पायल शोर मचाती थी

बिन बंसी धुन ये पायल भी मुरझाई है

जिस दिन से गया तू नींद मुझे ना आई है

पनघट सूना सूनी ये कदम्ब की डाली है

दिन भी लगता अब कुंदन रात ये काली है

ये कैसी प्रीत सांवरिया तूने निभाई है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।