पापी के के मुख से राम कोनी निकले

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

पापी के मुख से राम कोणी निकले ,

केशर ढुल गई गारे में ।

मिनख जमारो बन्दों एल्यो मत खोई ना

सुखरत करले जमारे न ।।

भैंस पद्मनी गहनों पहनायो ,

के जाने नोसर हारा ने ।

पहन कोणी जाने वा तो ओढ़ कोणी जाने

उम्र गमादी गोबर गारे में ।। 1

सोने की थाल में सुरडी परोषि ,

के जाने जिमन हारा ने ।

जिम कोणी जाने बातो झूंठ कोणी जाने

हुलड़ हुलढ मर गई जमारे में ।।2

काच के महल में कुतिया सुहाणि ,

के रंग चौबारे मे ।

सोया कोणी जाने बातो ओढ़ कोणी जाने

भूष भूष मर गई जमारे में ।।3

मानक मोती मूर्खा मिल गया ,

दलबा तो बेठ गया सारा ने ।

हीरे की पारख जौहरी जाने ,

के जाने मुर्ख गंवार ने ।। 4

अमृत नाथ अमर भया जोगी ,

जार गए काचे पारे ने

भूरा भजन हरिराम का करले

हरी मिले दसवा द्वारे में ।।5

पापी के मुख से राम कोणी निकले

केशर ढुल गई गारे में ।

मिनख जमारो बन्दों एल्यो मत खोई ना

सुखरत करले जमार न ।।

बोल नाथ जी महाराज की जय हो ।

बोल सतगुरु देव की जय हो ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।