मेरी कड के लै गया जींद बालक

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी कड के लै गया जींद बालका,

रख दिता अन्द्रो हिला के सोह्नियाँ,

तू अपने दीदार करा के सोह्नेया,

केह्डा तेरा शहर केह्डा टिया पिंड बालका,

मेरी कड के लै गया जींद बालका,

रोम रोम बोलदे जैकारा तेरे बुल वे,

निक्की निक्की तौर उत्ते मैं तां गया डुल वे

तेनु वेखदा रवां मैं बिंद बिंद बालका

मेरी कड के लै गया जींद बालका,

थां ते ढिकाना तेरा शाहतलाइयाँ ख़ास है

पौनाहारी जोगी मेरा रहंदा आस पास ऐ

ओह्ह भाग ला गया ओह साडे आके पिंड बालका

मेरी कड के लै गया जींद बालका,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।