मेरे बाबा का दरबार सुहाना लगता है

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे बाबे का दरबार सुहाना लगता है ll

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ll

मेरे बाबे का दरबार ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हमने तो, बड़े प्यार से, कुटिया बनाई है,

कुटिया में, बाबा तेरी, मूर्त सजाई है ll

ऐ जी अच्छा,,,जय हो lll, हमको,

तुम्हे सजाना, लगता है,

भक्तों का तो, दिल दीवाना, लगता है l

मेरे बाबे का दरबार सुहाना,,,,,,,,,,,,,,,

रंग बिरंगे, फूलों की, लड़ियाँ लगे प्यारी,

बाबा जी, तेरी सूरत, हमको लगे प्यारी ll

ऐ जी अच्छा,,,जय हो lll, हमको,

तुम्हे बुलाना लगता है,

भक्तों का तो, दिल दीवाना, लगता है l

मेरे बाबे का दरबार सुहाना,,,,,,,,,,,,,,,

हम तेरी, राहों में बाबा, खुद विछ जाएंगे,

सारी जिंदगी, बाबा जी तेरी, महिमा गाएंगे ll

ऐ जी अच्छा,,,जय हो lll,

हमको तेरे दर आना लगता है,

भक्तों का तो, दिल दीवाना, लगता है l

मेरे बाबे का दरबार सुहाना,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।