अनेकता में एकता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन देश भक्ति भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अनेकता में एकता विशेषता हमारी है,

जन्म भूमि राम की ध्रुव की तपस्थली,

शक्ति के प्रतीक में सहासी महाबली,

नर नारायणो की धरती ये प्यारी है,

अनेकता में एकता विशेषता हमारी है,

पुण्य कला देव वे कृष्ण भी यही हुए,

त्यागशील दधिचियो हरिश्चंद यही हुए,

कदम कदम पर त्याग की गाथा ही न्यारी है,

अनेकता में एकता विशेषता हमारी है,

दुनिया में व्यापत है संस्कृति की अजेयता,

मात्र भूमि धन्य है आशय ग्यानी श्रेष्ठ

भोग वादी संस्कृति सत्य शिव से हारी है,

अनेकता में एकता विशेषता हमारी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।