दो एकम दो दो दुनि चार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दो एकम दो दो दुनि चार प्रेम से बोलो मैया जी की जय जय कार,

दो तीया छे दो चौके आठ देखो जी देखो मेरी मैया जी के ठाठ,

दो एकम दो दो दुनि चार...........

मैया की महिमा है बड़ी महान जैकारे से गूंज ता है सारा जहां,

शेरोवाली मैया तेरी ऊंची है शान बचो को ममता का देती वरदान,

लाल है बिंदियां लाल चुनरियाँ लाली करे कमाल लाल लाल,

चोला लाल मैया का चोला लाल लाल

शक्ति की ज्योत देवो ने लगाई,

शक्ति की शक्ति में धूम मचाई,

भरते है पानी देवता के राजा इंद्र ने बाल्टी मंगवाई,

बेराव करते है निगरानी लेकर हाथ में भाल लाल लाल,

चोला लाल मैया का चोला लाल लाल

पवन देव् ने आके रसोई बनाई सूरज की किरणों ने अग्नि जलाई,

चन्दर माँ की चाँदनी ने किया है उजाला,

तारो सितारों ने थाली सजाई,

शेरावाली के भरे भंडारे ,

करती है माला माल माल लाल,

चोला लाल मैया का चोला लाल लाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।