राधिका पनघट पे चली राधिका

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हिचकी राधा की भर आयी,

याद जब सावरिया की आयी,

चलती सजके राधा रानी न फिर पल की देर लगाई

बाल में गजरा बांध के कजरा शर की करे आंखे काली

ओढ़ के सिर पर चटक चुनरिया छन छन गाती पायलिया

राधिका पनघट पे चली राधिका पनघट पे चली……

राधा ने पनघट पे जाकर सिर से मटकी उतारी,

मार कंकरी सावरिया ने गागरिया फोड़ डाली,

कहे श्याम कलम पट छलियाँ औ बरसाने वाली

ओढ़ के सिर पर चटक चुनरिया छन छन गाती पायलिया

राधिका पनघट पे चली राधिका पनघट पे चली……

राधा देखे नजर उठा के कहा छुपा सांवरियां,

कान्हा ने पीछे से आके झटकी सिर से चुनरियाँ,

रूप देख के हो गई लज्जित फूलो की डाली,

ओढ़ के सिर पर चटक चुनरिया छन छन गाती पायलिया

राधिका पनघट पे चली राधिका पनघट पे चली……

देख न जागत सांवरियां जी राधा जी शरमाई,

कहे अनाड़ी फिर कान्हा ने मुरली मधुर बजाई,

गुलशन कदम की डाली बोले कोयलिया काली,

ओढ़ के सिर पर चटक चुनरिया छन छन गाती पायलिया

राधिका पनघट पे चली राधिका पनघट पे चली……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।