ओ गुरुवर आ जाओ दर्श दिखा जाओ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन जैन भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भक्ति में शबरी ने श्रीराम को पाया था

भक्ति में प्रहलाद ने श्री कृष्ण को पाया था

कौन सी ऐसी भक्ति करु मैं मेरे घर गुरु आए

मैं ही मीरा मैं ही शबरी राम श्याम बन आओ

ओ गुरुवर आ जाओ ओ दर्श दिखा जाओ

ओ गुरुवर आ जाओ ओ दर्श दिखा जाओ

मैंने तुमसे गुरुवर एक बात छुपाई है

मन की बेरी में गुरुवर तेरी छवि छिपाई है

बिछड़ जो जाऊं मैं जो गुरुवर साथ देना तुम

मैंने तुमको अपना माना ध्यान जरा तुम देना

ओ गुरुवर आ जाओ ओ दर्श दिखा जाओ

ओ गुरुवर आ जाओ ओ दर्श दिखा जाओ।

संगीतकार:-पुष्कर जैन राज मुम्बई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।