हे स्वामी हे अन्तर्यामी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

स्वामी सब संसार के सांचे श्री भगवान

स्थावर जंगम पावक पाणी धरती बीज समान

सबमें महिमा थांरी देखी कुदरत के करबान

विप्र सुदामा को दाळद खोयो बाले की पहचान

दो मुठ्ठी तांदुल की चाबी दीन्हों द्रव्य महान

भारत में अर्जुन के आगे आप भया रथवान

अर्जुन कुळ का लोग निहार्या छूट गया तीर कमान

ना को मारे ना कोई मरतो तेरो ये अग्यान

चेतन जीव तो अजर अमर है ये गीता का ग्यान

मेरे पर प्रभु किरपा कीजौ बांदी आपणी जान

मीरां के प्रभु गिरिधर नागर चरणकमल में ध्यान

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।