काया नही रे सुहाणी भजन बिन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

काया नही रे सुहाणी भजन बिन

बिना लोण से दाल आलोणी भजन बिन

गर्भवास म्हारी भक्ति क भूली न

बाहर हूई न भूलाणी

मोह माया म नर लिपट गयो

सोयो तो भूमि बिराणी भजन बिन

हाड़ मास को बणीयो रे पिंजरो

उपर चम लिपटाणी

हाथ पाव मुख मस्तक धरीयाँ

आन उत्तम दीरे निसाणी भजन बिन

भाई बंधु और कुंटूंब कबिला

इनका ही सच्चा जाय

राम नाम की कदर नी जाणी

बैठे जेठ जैठाणी भजन बिन

लख चैरासी भटकी न आयो

याही म भूल भूलाणी

कहे गरु सिंगा सूणो भाई साधू

थारी काल करग धूल धाणी भजन बिन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।