ग्यारस की रात है वाह वाह क्या बात है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ग्यारस की रात है वाह वाह क्या बात है

चमक रहा सर पे चंदा रेहमत की बरसात है

ग्यारस की रात है

मन को चैन मिले दरबार तेरे में आके

रीझे प्रेमी तेरा बाबा तेरे भजन सुनाके

बाबा तेरा क्या ठाठ है कीर्तन की रात है

चमक रहा सर पे चंदा रेहमत की बरसात है

ग्यारस की रात है

हो जाऊं बाबा अर्पण तू स्वामी मेरा दर्पण

श्याम झुलाऊँ झूला हो जाए तेरा दर्शन

गल में बैजंती हार है मोरछड़ी तेरे हाथ है

चमक रहा सर पे चंदा रेहमत की बरसात है

ग्यारस की रात है

खाटू से पहचान है दिया शीश का दान है

तेरे धाम की मिटटी बाबा भक्तों की पहचान है

श्याम कुंड रास धार है होती मुलाकात है

चमक रहा सर पे चंदा रेहमत की बरसात है

ग्यारस की रात है

तेरी दया से बाबा ऐसा बना है नाता

जब भी मैं घबराता मेरे लिए तू आता

श्याम साजन का प्यार है बिखरे जज़्बात है

चमक रहा सर पे चंदा रेहमत की बरसात है

ग्यारस की रात है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।