यार दी कुल्ली

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॥ पावन पाठ ॥

मेनू एस कुल्ली विच आके सारी दुनिया भूली हैं

मेनू एस कुल्ली विच आके सारी दुनिया भूली हैं

विच सलेरण मेरे सोने यार दी कुल्ली हैं

फाल्गुन वे तेरी रूखा वर्गी संगत सलेरण मंदिर दी

कोई झाड़दा जोड़े ते कोई सेवा करदा लंगर दी

इथो नाम दान दी सबनू दात मिली वदमुल्ली हैं

विच सलेरण मेरे सोने यार दी कुल्ली हैं

एस कुल्ली विच पहला पाइयां नाथ मेरे देया मोरा ने

भगत दे संग महिमा गायी रुख पत्तयाँ दैया शोरान ने

एह वी तस तो मस न होई लख हनेरी झूली हैं

विच सलेरण मेरे सोने यार दी कुल्ली हैं

पौनहारि दे दर दा एह वि देखन जोग अजूबा हैं

दुनिया विच सलेरण वरगा धाम नही कोई दूजा हैं

नेट ते सर्च करो एदी महिमा हर एक पेज ते खुली हैं

विच सलेरण मेरे सोने यार दी कुल्ली हैं

सोने वर्गी चमक सुनहरी एस कुल्ली दिया कखं दी

एस चमक दे नाल किथे तकदीर चमकदी लखां दी

ऐथे शिव ते सोनू दी वि सुखिया किस्मत खुली हैं

विच सलेरण मेरे सोने यार दी कुल्ली हैं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।