सारी उमर गवां लयी तूं

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॥ पावन पाठ ॥

सारी उमर गवां लयी तूं

जिंदड़िये कुछ ना जहान विचो खट्टियाँ

क्यों करें तू माया माया, माया है दो पल दी छांयाँ

फँस के एहदे है मौज, क्यों होश भुल्ला लयी तूं

जिंदड़िये कुछ ना जहान विचो खट्टियाँ

सारी उमर गवां लयी तूं

जिंदड़िये कुछ ना जहाँन विच्चों खट्टियाँ

ना बचपन ना रही जवानी

ना रही अक्ख मस्तानी

आया बुढ़ापा जो जांदा नहीं हर चाल चला लई तूं

जिंदड़िये कुछ ना जहान विचो खट्टियाँ

सारी उमर गवां लयी तूं

जिंदड़िये कुछ ना जहान विचो खट्टियाँ

दुनियाँ तेन्नु प्यार सी करदी

प्यार वी बेशुमार करदी

बोल बोल के कोड ‘कंग’ दुश्मन बणा लई तूं

जिंदड़िये कुछ ना जहान विचो खट्टियाँ

सारी उमर गवां लयी तूं

जिंदड़िये कुछ ना जहान विचो खट्टियाँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।