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॥ पावन पाठ ॥

कही कल कल नदियां पुकारे,

कही पर्वत करे है इशारे,

अपना पण है याह है फ़िज़ा में,

मिले लोग यहाँ सभी प्यारे,

कही कल कल नदियां पुकारे,

कोई उर्दू कहे कोई हिंदी,.

कोई पंजाबी कोई सिंदी,

सूंदर संस्कर्ति है याह की,

मिल जल रहते है सारे,

कही कल कल नदियां पुकारे,

कश्मीर से कन्याकुमारी यात्रा अनोखी हमारी,

करके भारत के दर्शन हुए धन्य ये भाग हमारे,

कही कल कल नदियां पुकारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।