कैला मां लागे प्यारी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कैला मां लागे प्यारी मैं जाऊं रे बलिहारी

मैया की सूरत मन मोहे, सोने को सिर छत्तर सोहे

चुनर की शोभा न्यारी मैं जाऊं रे बलिहारी

नैनों में ममता झलक रही, माथे पर बिंदिया चमक रही

जैसे चंदा की उजियारी मैं जाऊं रे बलिहारी

गले में फूलों के हार सजे, हाथों में है हथियार सजे

मां करती शेर सवारी में जाऊं रे बलिहारी

नजरों से प्रेम सुधा बरसे, दर्शन को सबका मन तरसे

सच कहता आज अनाड़ी मैं जाऊं रे बलिहारी

लेखक टीकम जलन्द्रा उदयपुरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।