लक्ष्मी माँ तेरे बिना मान न मिले

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लक्ष्मी माँ तेरे बिना, मान न मिले,

मान न मिले माँ, सम्मान न मिले l*ll

पैसे बिना कोई, काम नहीं होता,

"काम नहीं होता कहीं, नाम ना होता" ll

धन के बिना तो, पहचान ना मिले,

मान न मिले माँ, सम्मान न मिले l

लक्ष्मी माँ तेरे बिना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

तुम ही धनवर, छाँ करती हो,

"निर्धन की, झोली भर्ती हो" ll

तेरी दया बिना, वरदान ना मिले,

मान न मिले माँ, सम्मान न मिले l

लक्ष्मी माँ तेरे बिना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

पूजा करते, देव तुम्हारी,

"ऊमा रमा, तुम पर बलिहारी" ll

नाम के बिना तो कहीं, दान ना मिले,

मान न मिले माँ, सम्मान न मिले l

लक्ष्मी माँ तेरे बिना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

माँ सबके, भंडारे भरना,

"तुम बिन क्या, जीना क्या मरना" ll

पैसे बिना दुनियाँ में, ज्ञान ना मिले,

मान न मिले माँ, सम्मान न मिले l

लक्ष्मी माँ तेरे बिना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

धुन- दुनियां चले न श्री राम के बिना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।